Career Opportunities In Physiotherapist
स्पर्श का जादू बनाए स्वस्थ :-
असल में फिजियोथेरेपी वह विज्ञान है जो गतिहीन अंग को काम करने की क्षमता को बढ़ाता है और मानव अंग सुचारू ढंग से काम करें यह सुनिश्चित करके स्वस्थ बनाता है। इसमें बीमारी और अक्षमता का मूल्यांकन, निदान और उपचार करना शामिल है। फिजियोथेरेपिस्ट आनुवांशिक कारण, बीमारी या दुर्घटना के कारण अक्षम हो चुके अंग को दुबारा सामान्य बनाने में मरीजों की मदद करते हैं। यह काम बहुत धैर्य और सावधानी की अपेक्षा करता है क्योंकि रोगी की तरफ से जरा भी असावधानी उस पर भारी पड़ सकती हैं।
भूमिका :-
एक फिजियोथेरेपिस्ट की मुख्य भूमिका में मरीज की स्थिमि का मुल्यांकन व निदान तथा शारीरिक तौर पर उपचार करना शामिल होता है। इसलिए इन पेशेवरों को मानव शरीर की संरचना और हड्डियों, मांसपेशियों तथा नसों की बारीक समझ होनी चाहिए। शानदार अंतरवैयाक्तिक कौशलों के साथ ही समानुभूति, धैर्य की भावना और लोगों को समझने की क्षमता होनी बेहद जरूरी है। इसका कारण यह कि शारीरिक अक्षमता के कारण रोगी चिडचिड़े हो जाते हैं। निश्चत तौर पर निपुणता और शारीरिक क्षमता की भी जरूरत होगी क्यांकि लगातार कई घंटो तक इस क्षेत्र में सेवा देने की जरूरत होती हैं।
चिकित्सकों के सानिध्य में काम करना होता है इसलिए संगठित और व्यवस्थित रहने और चिकित्सकों के निर्देशों का पालन करना भी बहुत जरूरी होगा।
कौन कर सकता है फिजियोथेरेपी की पढ़ाई? :-
कोर्स करने के लिए छात्र को जीव विज्ञान के साथ 12वीं उŸार्ण होना चाहिए और सभी विषयों में कम से कम 50ः अंक होने चाहिए। आम तौर पर उम्मीदवार की उम्र 17 वर्ष से कम नही होनी चाहिए। प्रवेश पाने के लिए यूनिवर्सिटी या राज्य द्वारा आयोजित किए जाने वाले कॉमन ऐंट्रेंस टेस्ट में होना चाहिए।
अवसर :-
इस पेशे के दायरे में बीमारी, विकृति या चोट आदि के कारण प्रभावित मरीजों से जुड़ी कई तरह की सेवाएं आती हैं जिसमें स्वास्थ्य संवर्धन, रोकथाम, उपचार, और मरीजों के पुनर्वास से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।
अस्पताल के सभी विभागों में फिजियोथेरेपिस्टों की जरूरत होती है, फिर चाहे यह आईसीयू हो या जरावस्था विभाग। इसके अलावा वे स्वतंत्र तौर पर या फिर बहुविषयक टीम के हिस्से के तौर पर भी सेवाएं दे सकते हैं।
स्पोर्ट्स सेंटर, टीमों और क्लबों के अलावा बहुत से क्षेत्रों में फिजियोथेरेपिस्ट की मांग बढ़ रही है एक कारण यह है कि जीवन शैली गतल खान-पान की वजह से और लोगों की औसत आयु बढ़ जाने से और दुर्घटना आदि के कारण शारीरिक अंगो का शिधिल हो जाना हीं अधिक हो गया है। लेकिन नौकरी नहीं करना चाहते तो आप फ्रीलांसर के तौर पर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।
एक नजर में :-
कॅरियर विकल्पः फिजियोथेरेपिस्ट, क्लीनिकल फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट, असिस्टेंट फिजियोथेरेपिस्ट प्रोग्रामः बीएससी/बीपीटी इन फिजियोथेरेपी अवधिः बीएससी (3 वर्ष), बीपीटी (4 वर्ष, 6 माह की इंटर्नशिप के साथ) योग्यताः फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेजी के साथ 10$2 उŸार्ण अवसरः अस्पताल, आईसीयू या जीरियाट्रिक्स, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राइवेट क्लीनिक, पुनर्वास केंद्र, स्पोर्ट्स क्लीनिक, फिटनेस सेंटर, यूनिवर्सिटी, कॉलेज, स्कूल आदि में।