Chartered Accountant Career Path in India
कंपनी के आय-व्यय का हिसाब रखने वाले :-
एक व्यवसाय तभी सफल हो सकता है जब इसके आय और व्यय का लेखा-जोखा रखा जाए। कितना पैसा खर्च हो रहा है और कितना आ रहा है इसकी जानकारी एकाउंटेट द्वारा रखी जाती है। पंरपरागत भारतीय समाज में बहीखाता लिखने का काम मुनीम किया करते थे अब पेशेवर बुककीपर यह भूमिका निभाते हैं। विश्व में वाणिज्य की जब से शुरूआत हुई तभी से ये व्यवसाय के अभिन्न अंग बने हुए हैं। यदि हिसाब रखने की कला में रूचि है और बैंको के स्टेटमेंट में आपकी रूचि है तो एकाउंटेंट के तौर पर कॅरियर संभावनाओं को तलाश सकते हैं।
भूमिका :-
एकाउंटेंट का मुख्य काम विŸाय दस्तावेज दुरूस्त रखना और उनकी जांच करना है। दस्तावेज दुरूस्त हों और करों का भुगतान सही समय पर किया जाए यह सुनिश्चित करना इनकी जवाबदेही होती हैं। ये वित्तीय गतिविधि के प्रदर्शन पर गौर करते हैं, इससे व्यवसाय को दक्षतापूर्वक चलाने में मदद मिलती है। ये फाइनैशियल मैनेजर, कंट्रोलर, डायरेक्टर, चार्टर्ड मैनेजमेंट एकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी और चीफ फाइनैंशियल ऑफिसर के तौर पर काम कर सकते हैं।
कोर्स :-
यह तीन वर्षीय डिग्री एकाउंटिंग, इकोनॉमिक्स, बिजनेस लॉ, टैक्सेशन, इंश्योरेंस और मैनेजमेंट से जुड़ी बेहतर समझ विकसित करने में मदद करती है। बैंकों, कंपनियो और अन्य वित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली से अच्छे से अवगत कराती है। यह आपको कैपिटल मार्केट, स्टॉक मार्केट, व अन्य की कार्यप्रणाली से अवगत कराती है। बात जब नौकरी के मौकों की आती है तो कॉमर्स के छात्र बेहतर स्थिति होते हैं क्योंकि अधिकांश क्षेत्र इनके लि खुले हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट या कंपनी सेक्रेटरी बनने की दिशा में यह एक समृद्धकारक शुरूआती कदम है। किसी भी विषय समूह से 12वीं उत्तीर्ण छात्र बीकॉम कोर्स के लिए आवेदन कर सकते है। हालांकि बीकॉम ऑनर्स करने के लिए 12वीं में अनिवार्य विषय के तौर पर गणित होना जरूरी है। देश के बहुत से कॉलेजों में यह कोर्स किया जा सकता है। कुछ प्रसिद्ध कॉलेजों में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, सेंट स्टीफेंस, लेडी श्री राम कॉलेज; कोलकता के सेंट जेवियर्स कॉलेज व चेन्नई के लोयोला कॉलेज तथा क्राइस्ट कॉलेज बैंगलोर के नाम शामिल हैं।
प्रवेश व शिक्षा :-
आम तौर पर मेरिट के आधार पर कोर्स में प्रवेश दिया जाता है। इसमें प्रवेश परीक्षा और सीधे अंकों के आधार पर प्रवेश दिया जाता हैं। कुछ संस्थान साक्षात्कार भी लेते हैं। डिग्री पंरपरागत बीकॉम, बीकॉम (ऑनर्स) या स्पेशलाइजेशन सहित बीकॉम के तौर पर किया जाता है। संस्थान विशेष में इनमें थोड़ा अंतर हो सकता है।
कोर्स फाइनैंस, एकाउंटिंग, टैक्सेशन और मैनेजमेंट के विषयों की समझ विकसित करने में मददगार रहे इस पहलू को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। छात्र को व्यष्टि अर्थशास्त्र, सांख्यिकी, व्यावसायिक संवाद, कारपोरेट लॉ और ऑडिटिंग आदि की भी जानकारी मिलती है। एक सकारात्मक पहलू यह होगा कि आप वित्तीय प्रबधंन और समष्टि अर्थशास्त्र से जुड़े सिद्धातों को भी समझ लेंगे।
कोर्स के बाद विकल्प :-
बीकॉम के बाद सीए, सीडब्ल्यूए या सीएफए जैसे कोर्स किए जा सकते हैं और आर्थिक रूप से अधिक बेहतर इन पेशों में प्रवेश पाया जा सकता है। एडवांस्ड मास्टर डिग्री, डिप्लोमा या सर्टीफिकेट प्रोग्राम के लिए भी जाया जा सकता है। पोस्टग्रैजुएट डिग्री (एमकॉम) और पीएचडी की मदद से शिक्षण, बैकिंग और वित्त के क्षेत्र में बेहतर कॅरियर बनाया जा सकता है।
अवसर :-
प्रमुख संस्थानों के छात्रों को भर्ती करने के लिए नियोक्ताओं में होड़ रहती है। दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में वर्ष 2012-13 के प्लेसमेंट के दौरान अधिकतम 19 लाख रु. वार्षिक का वेतन पैकेज प्रस्ताव मिला जबकि औसत 9-10 लाख रु. वार्षिक रहा। मोटे तौर पर 3 लाख रु. वार्षिक का पैकेज मिलने की उम्मीद की जा सकती हैं।
एक नजर में :-
कॅरियर विकल्पः एकाउंटेंट, बिजनेस एनालिस्ट, मैनेजमेंट एसोसिएट, मैनेजर फाइनैंस व एकाउंट्स प्रोग्रामः बीकॉम योग्यताः 12वीं उŸार्ण, विज्ञान या कॉमर्स के साथ