Optometry Courses & Careers After 12th
अंधेरे में रोशनी की एक किरण :-
कहा जाता है कि कपड़े आदमी के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। सही चश्मे भी ऐसा करते हैं। ऑप्टोमेट्रिस्ट वे पहले स्वास्थ्य चिकित्सक होते हैं जो दृष्टि से संबंधित दोषों को दूर करने से जुड़े हैं और सही चश्मा सुझाते हैं तथा आंखों से संबंधित गंभीर बीमारियों जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और उम्र से जुड़ी आखों की समस्याओं की पहचान करने में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत जैसे देश जहां आंखों की समस्याएं आम हैं इनकी भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
भूमिका :-
ये पेशेवर आंखों की देखभाल और दृष्टि संबंधी स्वास्थ्य से जुड़े प्राथमिक स्वस्थ्य सेवा प्रदाता हैं। वे चश्मे या कॉस्टेक्ट लेंस पहनने के सुझाव देते ही हैं, आम बीमारियों और समस्याओं के लिए दवाई भी सुझाते हैं। ऑप्टोमेट्रिस्ट आंशिक दृष्टि, आनुवांशिक बीमारियों, भेंगापन, नेत्र मांसपेशियों के कमजोर होने से जुड़ी समस्याओं के लिए समाधान सुझाते है और मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन पूर्ण व उपरांत सहायता देते हैं।
ऑप्टोमेट्री को क्यों चुना जाए? :-
असल में यह आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ा पेशा है। यह एक ऐसा पेशा है जो संभावित विकृति का पता करने के लिए आंखों की जांच करने से जुड़ा है। इसे क्षेत्र के पेशेवर सुधार के लिए जस्री लेंस या फिर आंखों से जुड़े अभ्यास करने का सुझाव देते हैं। ये आंखों से जुड़ी विकृति का पता लगाते हैं और उसका उपचार करते हैं या फिर इसकी अनुशंसा करते हैं।
भारत में ऑप्टोमेट्रिस्ट की बहुत जरूरत है। अरविंद आई केयर सिस्टम के लायन्स अरविंद इंस्टीट्यूट ऑफ कम्यूनिटी ऑप्थैल्मोलॉजी के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर तुलसीराज रविल्ला कहते है, ‘हमारे देश की लगभग एक चौथाई आबादी को चश्में की जरूरत है पर इनमें से केवल 15ः ही ऐसा करते हैं।’ ऑप्ट्रोमेट्री एक ऐसा क्षेत्र है जिससे जुड़े पेशेवरों की देश को बड़ी संख्या में जरूरत है। देश को 1 से डेढ़ लाख ऐसे पेशवरों की जरूरत है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में ऑप्टोमेट्री स्कूल देश में खुल रहे हैं।
कोर्स :-
कोर्स :-
ऑप्टोमेट्रिस्ट बनने के लिए ऑप्टोमेट्री में स्नातक डिग्री (बी ऑप्टोम) करनी होगी। इस चार वर्षीय प्रोग्राम के पहले तीन वर्ष पढ़ने के बाद अंत में एक वर्ष इंटर्नशिप करके क्लीनिकल अनुभव लेना होता है। बॉश ऐंड लांब स्कूल ऑफ ऑप्टोमेट्री द्वारा ऑप्टोमेटी व विजन सांइस में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एमएससी कोर्स की पेशकश की जाती हैं। कुछ संस्थान डिप्लोमा और अल्पावधि के अन्य प्रोग्राम कराते हैं।
अवसर :-
इन पेशेवरों को ऑप्टिकल शोरूम, आंखों के डॉक्टर, कॉन्टेक्ट लेंस उद्योग, अस्पतालों के नेत्र रोग विभागों और आंखों से जुड़े उत्पाद से जुड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में जॉब के मौके मिलते हैं। खुद का शोरूम खोल सकते हैं या फिर प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं।
प्रोडक्ट एग्जिक्युटिव के तौर पर या फिर चश्मे या लेंस निर्माता कंपनियों में प्रशिक्षिक के तौर पर या फिर ग्रामीण या शहरी झुग्गी बस्तियों में लोगों की आंखों की समस्याओं को दूर करने की दिशा में सक्रिय एनजीओं में सेवाएं दे सकते हैं। भारत में ऑप्टोमेट्रिस्ट का शुरूआती औसत वेतन 20-40 हजार रूपये मासिक तक होता है। इंडियन ऑप्टोमेट्रिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सुबोध के. खंडूरी कहते है, ‘ऑप्टोमेट्रिस्ट कॅरियर की शुरूआत ट्रेनी के तौर पर 20-25 हजार रूपये मासिक के वेतन पर कर सकते हैं।’
1977 में एम्स, नई दिल्ली से ऑप्टोमेट्री में डिप्लोमा करने के बाद विजुअल ऐंड सेंटर नामक अपनी कंपनी चलाने वाले श्री विपिन बक्शी कहते हैं, ‘डिप्लोमा करने के बाद दिल्ली के लॉरेंस एड मेयो में ऑप्थैल्मिक एग्जिक्युटिव के तौर पर पांच वर्ष तक काम किया। मैं हमेशा से अपना क्लीनिक शुरू करना चाहता था और 1982 में इसकी शुरूआत की। अब मैं ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट टीम के साथ काम करता हूं।’
बेशक यह अवसरों से भरा एक क्षेत्र है। गांव और शहरों के झुग्गी झोंपड़ी इलाकों में आंख संबंधित रोग बहुत होते हैं वहां काम करने वाली एनजीओं से जुड़ कर आप कर सकते हैं। आपको केंद्रित रहते हुए इसका लाळा लेना होगा, लेकिन इसके साथ ही बारीकियों पर भी नजर रखें।
एक नजर में :-
कॅरियर विकल्पः अस्पतालो और क्लीनिकों में ऑप्टोमेट्रिस्ट, प्रोडक्ट एग्जिक्युटिव व प्रशिक्षक, अपना व्यवसाय प्रांग्रामः बीएससी ऑप्ट्रोमेट्री, बीएससी ऑप्टोमट्री व ऑप्थैल्मिक टेक्नोलॉजी, ऑप्थैल्मिक टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा अवधिः 3-4 वर्ष (डिग्री प्रोग्राम)।