Role of Sericulturists
बनें रेशम विशेषज्ञ :-
कहा जाता है कि रेशम का आविष्कार सबसे पहले चीन की एक रानी ने किया था जिसने पाया कि उनके चाय के कप में एक धागे जैसे पदार्थ से बना ककून (कोया) गिरा। सिल्क फाइबर को धागे मे मिलाने के बाद उन्हें पता लगा कि रेशम के कपड़े कैसे बनते हैं। रेशम नरम होने के साथ-साथ मजबूत भी होता है। यह व्यापार का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया कि पश्चिम से पूर्व तक का रास्ता ही सिल्क रूट के नाम से जाना जाने लगा।
भूमिका :-
सेरिकल्चरिस्ट मुख्यतः रेशम तैयार करने के लिए रेशम के अंडे पालने से जुड़े होते हैं। वे मलबरी (शहतूत), ओक और देवदार की खेती से जुड़े होते हैं। रेशम के अंडे इन्हीं के पŸो खाते हैं। वे रेशम के कीडो के लार्वा से कोया बनने तक की प्रक्रिया पर निगरानी रखते हैं ताकि वे इतने मैच्योर हो जाएं कि उससे रेशमी धागा मिल सके। मैनेजमेंट स्तर पर उनका काम प्रोडक्शन के काम को संभालना, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग शामिल है।
सेरीकल्चरिस्ट की अच्छी नजर होनी चाहिए, अच्छी शारीरिक ताकत, हाथों और उंगलियों की चुस्ती के अलावा अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जरूरी हैं। एंट्री लेवल पर वेतन 12,000 रु. से 30,000 रु. तक हो सकता है।
आवेदन के लिए योग्यता और संस्थान :-
सीबीएसई या इसके समकक्ष बोर्ड से 10$2 (पीसीबी के साथ) के बाद बीएससी सेरीकल्चर के लिए आवेदन कर सकते हैं। अधिकतर संस्थान सीधे ही दाखिला देते हैं, कुछ संस्थान कोर्स के लिए उम्मीदवारों का चयन करते समय प्रवेश परीक्षा लेते है। बैचलर्स आॅफ सेरिकल्चर करवाने वाले मुख्य संस्थान हैं- तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर, यूनिवर्सिटी आॅफ एग्रीकल्चरल सांइसेज, बंगलौर। आप उन राज्यों से कोर्स कर कसते हैं जिनका भारत के रेशम उत्पादन में बड़ा योगदान है- जैसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर आदि। इन राज्यों में बहुत अच्छा सिल्क तैयार होता है।
इन ग्रैजुएटों के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र में खूब संभावनाएं हैं। आगे पढ़ने के इच्छुक छात्र एडवांस्ड डिग्री ले सकते हैं। वे खादी बोर्ड, नाबार्ड, सेंट्रल एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल, सेंट्रल सिल्क बोर्ड, नाबार्ड, सेंट्रल आदि में जाॅब तलाश सकते हैं। निजी क्षेत्र में सेरीकल्चारिस्ट के रूप में सिल्क मिल में काम कर सकते हैं। सेरीकल्चर आॅपरेटर या जूनियर इंस्पेक्टर के रूप में काम तलाश सकते हैं। सिल्क कपड़ों की मांग बढ़ रही है क्योंकि लोग भारतीय फैब्रिक पसंद कर रहे हैं तो पेशेवरों की मांग बढना भी स्वाभाविक हैं।
एक नजर में :-
कॅरियर विकल्पः सेरीकल्चरिस्ट, सेरीकल्चर आॅपरेटर, असिस्टेंट-जूनियर इंस्पेक्टर सेरीकल्चर प्रोग्रामः बीएससी सेरीकल्चर अवधिः 4 साल, योग्यताः 10$2 पीसीबी (बाटनी और जूलाॅजी)।