Scope of Agricultural Engineering
अर्थव्यवस्था की रीढ़ को बनाएं मजबूत :-
यदि कृषि को दुनिया का प्राणियों का पेंट भरना है तो इसमें विज्ञान का समावेश करना होगा। चूंकि विश्व की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है तो उपलब्ध संसाधनों को भी उसी तेजी से बढाना होगा। लेकिन दुनिया के सामने जो पर्यावरणीय चुनौतियां आ रही है तो इसे ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत पडे़गी जो क्षेत्र को पर्यावरणीय असंतुलन से बचाए रखकर इसे संसाधन प्रदाता बनाए रखे। कृषि इंजीनियर और विशेषज्ञों पर इस प्राथमिक क्षेत्र को स्थाई रूप से बचाए रखने के लिए नवाचार तलाशनें का दायत्वि रहता है।
भूमिका :-
कृषि इंजीनियरों का काम कृषि उत्पादन से जुड़ी समस्याओं का समाधान तलाशना है। इनका काम ऐसी टेक्नोलाॅजी और प्रोडक्ट तैयार करना है जो कृषि उद्योग को सुधार सकें। इनकी सेवाएं फार्मिंग इंडस्ट्री कंसल्टेंट्स, एग्रीकल्चर कमोडिटीज प्रोसेसर, अमूल, आईटीसी, प्रा एग्रो सीड्स के अलावा आहार, फाइबर और ईंधन से जुडी कंपनियां लेती हैं। कृषि इंजीनियर का औसत वेतन 2.5 से 4.5 लाख रु. सालाना तक होता है।
क्या है कृषि विज्ञान :-
कृषि विज्ञान बायोलाॅजी का मल्टी डिसिप्लिनरी क्षेत्र है जिसमें फसल उत्पादन, पशुधन, मौसम, अर्थशास्त्र और समाज विज्ञान होता है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जीडीपी में इसका योगदान 14 प्रतिशत है और देश की 50 प्रतिशत आबादी अपने निर्वहन के लिए इस पर निर्भर है। इस तरह भारतीय संदर्भ में कृषि विज्ञान का अध्ययन काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। कृषि प्रोफेशनलों के लिए इस क्षेत्र में कॅरियर बहुत संतुष्टि देने वाला होगा।
कौन से हैं श्रेष्ठ संस्थान :-
कई यूनिवर्सिटीज बीएससी एग्रीकल्चर और संबद्ध विषयों में बीटेक और एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग प्रोग्राम करवाती है, इनमें तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, चैधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी मुख्य हैं।
ग्रैजुएशन के बाद क्या :-
कृषि क्षेत्र आपको कई क्षेत्रोें में स्पेशलाइजेशन का विकल्प देता है। एग्रीकल्चर स्टटिटिक्स और मैथमेटिक्स पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए एग्री बाॅटनी, एग्री-बायोटेक्नोलाॅजी, एग्री-केमिस्ट्रि, एग्री-इकोनाॅमिक्स, एग्री एक्सटेंशन, एग्रीनाॅमी, एग्री-इंजीनियरिंग और सोशल फारेस्ट्री शामिल हैं। आईएआरआई, पूसा, नई दिल्ली, एनडीआरआई, करनाल रिसर्च के मामले में श्रेष्ठ हैं।
कहां मिलेगी जाॅब :-
आप ग्रैजुएशन के बाद एग्रीकल्यरल स्पेशलिस्ट, प्रोडक्ट मैनेजर या रिसर्चर के रूप में काम कर सकते हैं। निजी क्षेत्र में इंश्योरेंस, बैंक और कृषि क्षेत्र की बड़ी कंपनियों जैसे आईटीसी, मोंसाटो, रिलांयस इंडस्ट्रीज, नोवोजाइम और कारगिल भी ग्रैजुएट्स को हायर करती हैं। ऐसी कंपनियां अपनी कमर्शियल फार्मिंग के विस्तार के लिए एडवांस्ड तकनीक अपनाना चाहती हैं और फ्रैंश ग्रैजुएट्स की उन्हें तलाश रहती है। एग्रीकल्यर ग्रैजुएट्स को नियक्त करने वाले अन्य संस्थान हैं- एनजीओं और बिना लाभ के चलने वाले संस्थान।
एक नजर में :-
कॅरियर विकल्पः कृषि इंजीनियर, कृषि विशेषज्ञ, कृषि प्रबंधक, रिसर्चर, गुणवता नियंत्रक अधिकारी, प्रोडक्ट मैनेजर प्रोग्राम बीएससी (कृषि); बीटेक (एग्रीकल्चर इन्फाॅमेशन टेक्नोलाॅजी); बीटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग); अवधिः चाल साल (कुछ संस्थानों में पांच साल); योग्यताः 10$2 पीसीबी/एम बैचलर्स डिग्री के लिए।