एक नजर आईपीओ (IPO) पर

क्या है आईपीओ (IPO) इसका अर्थ है इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग। जब भी किसी कंपनी को पूंजी की आवश्यकता होती हैं तो कंपनी को अपने शेयर निवेशकों यानी पब्लिक को बेचती है। पहली बार कंपनी के शेयर बेचने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसे स्टॉक मार्केट में आईपीओ कहा जाता है। शेयर खरीदने के बाद निवेशक को कंपनी में भागीदारी मिल जाती है। और कंपनी को उनकी आवश्यक पूंजी।
कैसे करें आईपीओ में निवेश - इच्छुक निवेशक को सबसे पहले एक डिमाट अकाउंट की आवश्यकता होती है। डिमाट अकाउंट के माध्यम से ही शेयर निवेशक के पास जमा होते है। आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए प्राइमरी मार्केट में ओपन रहता है। यह अवधि 3 से 10 दिनों तक होती है। सब्सक्रिप्शन पीरियड के तहत इन्वेस्टर एक या एक से अधिक लॉट्स की बोली लगाता है। एक लॉट में कंपनी द्वारा निर्धारित शेयर्स होते हैं। एक इन्वेस्टर अधिकतम 2 लाख रूपए तक निवेश कर सकता है। जितने रूपए का निवेश करना चाहते हैं उतने पैसे आपके डिमाट अकाउंट में होने चाहिए। जब आप आईपीओ सब्सक्राइब करते हैं तो वह पैसा आपके अकाउंट में ब्लॉक हो जाता है। फिर कंपनी डिसाइड करती हैं कि निवेशक को अपने शेयर्स अलॉट करने हैं या नहीं। प्राइमरी मार्केट के बाद कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग होती है। स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने के पर शेयर्स को कोई भी खरीद और बेंच सकता हैं।
कंपनी द्वारा आईपीओ क्यों - आईपीओ कंपनियों को कारोबार बढ़ाने, अपने बिजनेस में नुकसान या वित्तिक समस्या का बंटवारा निवेशकों से करने। नुकसान में जा रही कंपनी अपने स्टाटअर्प कॉस्ट को रिकवर करने के लिए अथवा कंपनी अपने ब्राडिंग में मदद (स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने के बाद कंपनी में निवेशकों की हिस्सेदारी से पब्लिक में कंपनी की जानकारी प्राप्त करने की उत्सुकता बढ़ती है।) करने के लिए इस्तेमाल करती है।
निवेश में सावधानीयाँ - कंपनी नुकसान में है या मुनाफे में इस बात का ध्यान न रखकर बिजनेस मॉडल को समझते हुए आईपीओ के उद्देश्यों को देखते हुए (कंपनी आईपीओ के उद्देश्यों को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्प्रेक्ट ;क्भ्त्च्द्ध में करती है।) करना चाहिए। नए स्टार्टअप में उन निवेशकों को निवेश करना चाहिए जो स्टार्टअप कंपनी को समझते हो। कंपनी का भविष्य कैसा होगा इसकी जोखिमों को ध्यान रखते हुए निवेश करना चाहिए।