मुश्किल समय में टीम का प्रोत्साहन

मुश्किल समय इंसान को तोड़कर रख देता है। ऐसे समय में अगर कोई मोटिवेशन दे तो स्थिति सुधर सकती है। यही बात कंपनी और एम्लॉई के रिश्ते पर लागू होती है। परेशानियों के दौर में कंपनी को अपने एम्प्लॉइज का मोटिवेशन बनाए रखना चाहिए - संतुलित संस्थान और मैनेजर की ओर से क्रिएटिव और इनोवेटिव रेस्पॉन्स मिले तो एम्प्लॉइज मुश्किल दौर को हैंडल कर सकते हैं। कंपनी को मंदी या किसी बुरी स्थिति का जिक्र करना चाहिए, पर इस पर बहुत ज्यादा चर्चा करने से बचना चाहिए। कंपनी को संतुलित संवाद करना चाहिए, ताकि टीम के सदस्य अच्छी तरह काम करते रहें।

हार्ड वर्क को पहचान मिले

अगर मैनेजर एम्प्लॉइज के हार्ड वर्क के लिए उनकी प्रशंसा करता है तो वे मोटिवेट रहते हैं। टीम लीडर को सिर्फ रिजल्ट्स की प्रशंसा करने के बजाय एम्प्लॉई के प्रयासों का भी जिक्र करना चाहिए। आप ईमेल में प्रशंसा का नोट डाल सकते हैं या सार्वजनिक रूप से एम्प्लॉई की तारीफ कर सकते हैं।

सफलता की कहानी बताएं

बुरे समय में कंपनी को आगे बढ़कर एम्प्लॉइज के शानदार प्रयासों और सफलता की कहानियों को हर तरफ सर्कुलट करना चाहिए। इससे एम्प्लॉइज तक संदेश जाता है कि उनसे क्या अपेक्षा की जा रही है। सक्सेज स्टोरी का संदेश पूरी तरह स्पष्ट हो।

उनकी बातों को सुनें

मुश्किल समय में एम्प्लॉइज भावनाओं में बह जाते हैं और नेगेटिव बातें करने लगते हैं। ऐसे में आपको अपने एम्प्लॉइज को फील करवाना चाहिए कि आपको उनकी परवाह है। आपको उनकी बातें सुननी चाहिए और मुश्किलों को दूर करने में रुचि दर्शानी चाहिए। इससे उन्हें अच्छा लगेगा और वे कंपनी के साथ अच्छी तरह से जुड़कर काम पूरा कर पाएंगे।

टॉप मैनेजमेंट का जुड़ावजं

टॉप मैनेजमेंट को एम्प्लॉइज से बात करनी चाहिए। इस दौरान उन्हें विचार प्रस्तुत करने चाहिए और सबका फीडबैक लेना चाहिए। इससे लोगों के बीच में मैनेजमेंट के बारे में फैल रही अफवाहें खत्म होती हैं और विश्वास मजबूत होता है। टॉप मैनेजमेंट को संदेश देना चाहिए कि हम सब एक हैं।