Question Bank
CUET PG Nyaya Vaisheshika Exam - Sanskrit
Duration: 90 · Questions: 75 · Max Marks: 300 · Language: 1
Nyaya Vaisheshika
1
न्याय दर्शन की रचना किसने की थी?
2
न्याय दर्शन की प्रमुख ग्रंथ क्या है?
3
गौतम का न्यायसूत्र मुख्य रूप से किस विषय पर आधारित है?
4
न्याय दर्शन किस दर्शन के साथ परस्परपूरक है?
5
न्याय दर्शन में ज्ञान प्राप्ति के कितने साधन माने गए हैं?
6
न्याय दर्शन में 'प्रमाण' का अर्थ क्या है?
7
न्याय दर्शन की परंपरा को कितने चरणों में विभाजित किया गया है?
8
प्राचीन न्याय दर्शन की विशेषता क्या है?
9
मध्यकालीन न्याय दर्शन किस समय में विकसित हुआ?
10
नव्य न्याय दर्शन किसने प्रतिपादित किया?
11
न्याय दर्शन में 'अर्थ' का मुख्य उद्देश्य क्या है?
12
वैशेषिक और न्याय दर्शन का मुख्य संबंध क्या है?
13
गौतम का न्यायसूत्र किस भाषा में लिखा गया है?
14
न्याय दर्शन के अनुसार, ‘सिद्धांत’ क्या है?
15
प्राचीन न्याय दर्शन में ज्ञान के मुख्य स्रोत क्या हैं?
16
न्याय दर्शन में ‘प्रत्यक्ष’ का क्या अर्थ है?
17
न्याय दर्शन में ‘अनुमान’ किसके आधार पर ज्ञान प्राप्त करता है?
18
न्याय दर्शन में ‘उपमान’ का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?
19
न्याय दर्शन में ‘शब्द’ का क्या अर्थ है?
20
न्याय दर्शन में ‘विवेक’ का महत्व किसमें है?
21
न्याय दर्शन में ‘अभ्यास’ का अर्थ क्या है?
22
प्राचीन न्याय दर्शन में ‘तत्व’ को किस रूप में देखा गया है?
23
न्याय दर्शन में ‘भूत’ किसे कहते हैं?
24
न्याय और वैशेषिक दर्शन के अनुसार, ‘सृष्टि’ का आधार क्या है?
25
न्याय दर्शन में ‘कारण’ का प्रमुख प्रकार क्या है?
26
मध्यकालीन न्याय दर्शन में ‘प्रत्यय’ का महत्व क्या है?
27
नव्य न्याय दर्शन में तर्क की प्रमुख विशेषता क्या है?
28
न्याय दर्शन में ‘सत्य’ का प्रमुख मापदंड क्या है?
29
न्याय दर्शन के अनुसार, ‘असत्य’ क्या है?
30
न्याय दर्शन में ‘अव्यक्त’ का अर्थ क्या है?
31
न्याय दर्शन में ‘साध्य’ का अर्थ क्या है?
32
न्याय दर्शन में ‘साधक’ किसे कहते हैं?
33
न्याय दर्शन में ‘साधन’ का क्या अर्थ है?
34
न्याय दर्शन में ‘अभाव’ का अर्थ क्या है?
35
न्याय दर्शन में कितने प्रकार के ‘अभाव’ माने गए हैं?
36
न्याय दर्शन में प्रत्यक्ष ज्ञान के कितने प्रकार बताए गए हैं?
37
न्याय दर्शन में ‘समान्य प्रत्यक्ष’ किसे कहते हैं?
38
न्याय दर्शन में ‘विशेष प्रत्यक्ष’ का क्या अर्थ है?
39
न्याय दर्शन में अनुमान के कितने प्रकार माने गए हैं?
40
न्याय दर्शन में ‘पूर्वानुमान’ का अर्थ क्या है?
41
न्याय दर्शन में ‘अनुमेय’ का क्या अर्थ है?
42
न्याय दर्शन में ‘संयोग’ का क्या अर्थ है?
43
न्याय दर्शन में ‘विपरीत संयोग’ का अर्थ क्या है?
44
न्याय दर्शन में उपमान कितने प्रकार का होता है?
45
न्याय दर्शन में ‘सम्भव उपमान’ किसे कहते हैं?
46
न्याय दर्शन में ‘असाध्य उपमान’ का अर्थ क्या है?
47
न्याय दर्शन में शब्द प्रमाण कितने प्रकार का होता है?
48
न्याय दर्शन में ‘प्रामाणिक शब्द’ किसे कहते हैं?
49
न्याय दर्शन में ‘अप्रामाणिक शब्द’ का क्या अर्थ है?
50
न्याय दर्शन में ‘सिद्धि’ का अर्थ क्या है?
51
न्याय दर्शन में ‘असिद्धि’ का अर्थ क्या है?
52
न्याय दर्शन में ‘दर्शन’ का मूल अर्थ क्या है?
53
न्याय दर्शन के अनुसार, ‘तर्क’ का क्या महत्व है?
54
न्याय दर्शन में ‘साधक’ और ‘साध्य’ का क्या संबंध है?
55
न्याय दर्शन में ‘कारण’ को किस रूप में देखा गया है?
56
न्याय दर्शन में ‘फल’ का क्या अर्थ है?
57
न्याय दर्शन में ‘संयोग’ और ‘विपरीत संयोग’ में क्या भेद है?
58
न्याय दर्शन में ‘प्रत्यय’ का अर्थ क्या है?
59
न्याय दर्शन में ‘पूर्वानुमान’ और ‘अनुमेय’ में क्या भेद है?
60
न्याय दर्शन में ज्ञान के कितने प्रकार बताए गए हैं?
61
न्याय दर्शन में ‘प्रत्यक्ष’ के प्रकार कौन से हैं?
62
न्याय दर्शन में ‘अनुमान’ का प्रयोग किस लिए होता है?
63
न्याय दर्शन में अनुमान के प्रकार कौन से हैं?
64
न्याय दर्शन में ‘उपमान’ के कितने प्रकार हैं?
65
न्याय दर्शन में ‘शब्द’ के प्रकार कौन से हैं?
66
न्याय दर्शन में ‘सत्य’ का क्या महत्व है?
67
न्याय दर्शन में ‘असत्य’ का क्या अर्थ है?
68
न्याय दर्शन में ‘साधक’ का अर्थ क्या है?
69
न्याय दर्शन में ‘साध्य’ का अर्थ क्या है?
70
न्याय दर्शन में ‘साधन’ का अर्थ क्या है?
71
न्याय दर्शन में ‘अभाव’ के प्रकार कौन से हैं?
72
न्याय दर्शन में ‘सिद्धि’ का अर्थ क्या है?
73
न्याय दर्शन में ‘असिद्धि’ का अर्थ क्या है?
74
न्याय दर्शन में ‘दर्शन’ का अर्थ क्या है?
75
न्याय दर्शन में ‘तत्व’ किसे कहते हैं?