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Objective Questions

Latest Jharkhand Eligibility Test Economics Exam Question (Objective Questions), MCQ in Hindi

Subjects : Teaching/ research aptitude, Domain knowledge (Economics/Rural Economics)

Question Bank Jharkhand Eligibility Test Economics Exam - Hindi
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Teaching/ research aptitude

प्रश्न 1Single Answer
किसी विद्यालय में छात्र, शिक्षक के कार्य के प्रतिफल कहे जाते हैं। वे ऐसे शिक्षक से सर्वाधिक हानिकारक तरीके से प्रभावित रहते हैं जो शिक्षक -
  1. A
    छात्रों को स्नेह करते हैं
  2. B
    छात्रों को पढ़ाना से कतराते हैं
  3. C
    छात्रों को अनुचित गृहकार्य देते हैं तथा उनसे अपेक्षाएँ करते हैं   
  4. D
     संवेगात्मक अस्थिरता एवं दुर्बल चरित्र वाले हैं
प्रश्न 2Single Answer
आधुनिक शिक्षाशास्त्रियों के अनुसार छात्र-समिति को निम्नलिखित कार्य नहीं करना चाहिए-
  1. A
    प्रशासन की बागडोर को अपने हाथ में ले लेना  
  2. B
    छात्र मनोबल ऊँचा करने वाली विधाएँ
  3. C
    पाठ्य-सहगामी क्रियाओं हेतु छात्र संगठन का निमार्ण
  4. D
    प्रजातान्त्रिक मूल्यों के अनुरूप नेता का निमाण
प्रश्न 3Single Answer
नेतृत्व केवल उस व्यक्ति द्वारा प्रदान किया जा सकता है, जिसमें  गुण होते हैं-
  1. A
    सामान्य व्यक्ति जैसा 
  2. B
    उच्च आदर्शों का
  3. C
    प्रतिष्ठा का    
  4. D
    क्रूरता का
प्रश्न 4Single Answer
यदि आपकी कक्षा में एक छात्र नाखून काटने आदि है, तो आप उसके व्यवहार सम्बन्धी निष्कर्ष निकालेंगे-
  1. A
    अत्यधिक ऊर्जा की उत्पति हैं      
  2. B
    सांवेगिक असन्तुलन का प्रतीक है,
  3. C
    किसी विटामिन विशेष का शरीर में अभाव है
  4. D
    ग्रन्थियो के स्त्रावों में अनियमितता है
प्रश्न 5Single Answer
आप अपने छात्रों में श्रम के महत्व को कैसे उत्पन्न करेंगे?
  1. A
    छात्रों को श्रम सम्बन्धी साहित्य को पढ़ने को कहेंगे   
  2. B
    छात्रों को श्रम करने के व्यवहारिक अवसर प्रदान कर
  3. C
    स्वयं भी छात्रों के समक्ष श्रम करके उदाहरण प्रस्तुत करेंगे
  4. D
    अपने छात्रों को श्रम के महत्व पर भाषण देंगे
प्रश्न 6Single Answer
निम्नलिखित में से कौन-सा पद, श्रेष्ठ नागरिक गुणों को विकसित करने का उपाय नहीं हो सकता
  1. A
    छात्रों को क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का पर्याप्त ज्ञान कराया जाए      
  2. B
    छात्रों को सत्य, तथ्य, कल्पना एवं झूठ में विवेकशील भेद करने का प्रशिक्षण दिया जाए
  3. C
    छात्रों को सामाजिक समस्याओं की नग्न सच्चाई का अहसास कराया जाए
  4. D
    छात्रों में प्रभावी चिन्तन की जड़े सिचित की जाएँ
प्रश्न 7Single Answer
नीचे लिखे कथनों में से कौन-सा एक उत्तम शिक्षक का पहचान चिन्ह नहीं है?
  1. A
    उसे स्कूल में होने वाले प्रोग्रामों का ज्ञान नहीं है
  2. B
    उसे किशोरों के मनोविज्ञान का ज्ञान नहीं है
  3. C
    उसे अपनी विषय वस्तु के उद्देश्यों का ज्ञान नहीं है
  4. D
    उपरोक्त में से कोई नहीं
प्रश्न 8Single Answer
यदि बालकों में अन्तःवैयक्तिक सम्बन्धों की पुरर्स्थापना करनी है तो शिक्षक को चाहिए कि वह-
  1. A
    उन्हें स्वतन्त्र छोड़ दे           
  2. B
    उनके शारीरिक संगठन को ध्यान में रखे
  3. C
    उनके सामाजिक-संवेगात्मक विकास का अध्ययन करे तथा अन्तःवैयक्तिक सम्बन्धों की और प्रेरित करे
  4. D
    मानसिक विकास तथा सामाजिक परिवेश का अध्ययन करे
प्रश्न 9Single Answer
सम्प्रेषण में सन्निकटता का निर्धारण तत्व है-
  1. A
    आर्थिक स्थिति 
  2. B
    आकर्षण
  3. C
    सामाजिक रूढ़िया  
  4. D
    सामाजिक नियम
प्रश्न 10Single Answer
छात्रों में श्रेष्ठ संस्कारों का विकास करना, आप क्यों आवश्यक मानते हैं?
  1. A
    संस्कार व्यक्तित्व को संकुचित बना देते हैं
  2. B
    संस्कार चरित्र निर्माण करते हैं
  3. C
    मैं संस्कारों पर विश्वास नहीं रखता
  4. D
    संस्कार व्यक्तित्व का भरण करते हैं
प्रश्न 11Single Answer
गद्यांश :
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल का लोकतंत्र में क्या महत्त्व हैं? यह प्रश्न विचारणीय है। लोकतंत्र-रूपी वृक्ष जनता द्वारा बोया और सींचा जाता है, इसके पल्लवन एवं पुष्पन में मीडिया की विशेष भूमिका होती हैं। भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। लोकतान्त्रिक राष्ट्र में नागरिकों को विशिष्ट अधिकार और स्वतंत्रताएँ प्राप्त होती हैं।भारतीय संविधान ने भी अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है लेकिन जनता के व्यापक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली स्वतन्त्रता बाधित भी की जानी चाहिए।
भारत जैसे अल्पशिक्षित देश में इस प्रकार के सर्वेक्षण अनुचित हैं। देश की आम जनता पर मीडिया द्वारा किए जाने वाले चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और चुनाव के तुरन्त पश्चात् किए जाने वाले एक्जिट पोल का भ्रामक प्रभाव पड़ता है। वह विजयी होती पार्टी की ओर झुक जाती है। आज भी सामान्य लोगों के बीच में आम धारणा है कि हम धारणा है कि हम अपना वोट खराब नहीं करेंगे, जीतते प्रत्याशी को ही वोट देंगे ।वर्तमान में बाजारवाद अपने उत्कर्ष पर है और मीडिया इसके दुष्प्रभाव से अनछुआ नहीं है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आज मीडिया भी अधिकाधिक संख्या में प्रसार और धन पाने को बुभुक्षित है। मीडिया सत्ताधारी और मजबूत राजनीतिक दलों के प्रभाव में भी रहता है।ये दल धन के बल पर लोक रूझान को अपने पक्ष में दिखाने में सफल हो जाते हैं और सम्पूर्ण चुनावी प्रक्रिया को ही धता बता देते हैं। इस प्रकार सत्ता एवं धन इन सर्वेक्षणों को प्रभावित करते है। इन्हें दूध का धुला नहीं कहा जा सकता। भारत जैसे लोकतान्त्रिक राष्ट्र में जहाँ जनता निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से अपना मत अभिव्यक्त करती है, वहाँ इन सर्वेक्षणों के औचित्य-अनौचित्य पर विचार किया जाना चाहिए।
न्यायालय को संविधान के अनुसार चलने की बाध्यता है लेकिन संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। वह अपने अधिकारों का प्रयोग करके कोई सार्थक प्रयास कर सकती है।
प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली स्वतंत्रता क्यों बाधित होनी चाहिए?
  1. A
    श्रेष्ठ लोकतंत्र की स्थापना हेतु 
  2. B
    वोट के सही उपयोग हेतु
  3. C
    साफ-सुथरी चुनाव प्रक्रिया हेतु
  4. D
    लोकहित को सर्वोपरि रखने हेतु
प्रश्न 12Single Answer
गद्यांश :
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल का लोकतंत्र में क्या महत्त्व हैं? यह प्रश्न विचारणीय है। लोकतंत्र-रूपी वृक्ष जनता द्वारा बोया और सींचा जाता है, इसके पल्लवन एवं पुष्पन में मीडिया की विशेष भूमिका होती हैं। भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। लोकतान्त्रिक राष्ट्र में नागरिकों को विशिष्ट अधिकार और स्वतंत्रताएँ प्राप्त होती हैं।भारतीय संविधान ने भी अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है लेकिन जनता के व्यापक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली स्वतन्त्रता बाधित भी की जानी चाहिए।
    भारत जैसे अल्पशिक्षित देश में इस प्रकार के सर्वेक्षण अनुचित हैं। देश की आम जनता पर मीडिया द्वारा किए जाने वाले चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और चुनाव के तुरन्त पश्चात् किए जाने वाले एक्जिट पोल का भ्रामक प्रभाव पड़ता है। वह विजयी होती पार्टी की ओर झुक जाती है। आज भी सामान्य लोगों के बीच में आम धारणा है कि हम धारणा है कि हम अपना वोट खराब नहीं करेंगे, जीतते प्रत्याशी को ही वोट देंगे ।वर्तमान में बाजारवाद अपने उत्कर्ष पर है और मीडिया इसके दुष्प्रभाव से अनछुआ नहीं है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आज मीडिया भी अधिकाधिक संख्या में प्रसार और धन पाने को बुभुक्षित है। मीडिया सत्ताधारी और मजबूत राजनीतिक दलों के प्रभाव में भी रहता है।ये दल धन के बल पर लोक रूझान को अपने पक्ष में दिखाने में सफल हो जाते हैं और सम्पूर्ण चुनावी प्रक्रिया को ही धता बता देते हैं। इस प्रकार सत्ता एवं धन इन सर्वेक्षणों को प्रभावित करते है। इन्हें दूध का धुला नहीं कहा जा सकता। भारत जैसे लोकतान्त्रिक राष्ट्र में जहाँ जनता निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से अपना मत अभिव्यक्त करती है, वहाँ इन सर्वेक्षणों के औचित्य-अनौचित्य पर विचार किया जाना चाहिए। न्यायालय को संविधान के अनुसार चलने की बाध्यता है लेकिन संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। वह अपने अधिकारों का प्रयोग करके कोई सार्थक प्रयास कर सकती है।
लेखक ने ‘दुध का धुला न होना‘ किसे कहा गया  है?
  1. A
    मीडिया से सम्बन्धित लोगों को  
  2. B
    चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल को
  3. C
    सत्ताधारी और बड़े राजनीतिक दलों को
  4. D
    संसद और न्यायालय को
प्रश्न 13Single Answer
गद्यांश :
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल का लोकतंत्र में क्या महत्त्व हैं? यह प्रश्न विचारणीय है। लोकतंत्र-रूपी वृक्ष जनता द्वारा बोया और सींचा जाता है, इसके पल्लवन एवं पुष्पन में मीडिया की विशेष भूमिका होती हैं। भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। लोकतान्त्रिक राष्ट्र में नागरिकों को विशिष्ट अधिकार और स्वतंत्रताएँ प्राप्त होती हैं।भारतीय संविधान ने भी अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है लेकिन जनता के व्यापक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली स्वतन्त्रता बाधित भी की जानी चाहिए।
    भारत जैसे अल्पशिक्षित देश में इस प्रकार के सर्वेक्षण अनुचित हैं। देश की आम जनता पर मीडिया द्वारा किए जाने वाले चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और चुनाव के तुरन्त पश्चात् किए जाने वाले एक्जिट पोल का भ्रामक प्रभाव पड़ता है। वह विजयी होती पार्टी की ओर झुक जाती है। आज भी सामान्य लोगों के बीच में आम धारणा है कि हम धारणा है कि हम अपना वोट खराब नहीं करेंगे, जीतते प्रत्याशी को ही वोट देंगे ।वर्तमान में बाजारवाद अपने उत्कर्ष पर है और मीडिया इसके दुष्प्रभाव से अनछुआ नहीं है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आज मीडिया भी अधिकाधिक संख्या में प्रसार और धन पाने को बुभुक्षित है। मीडिया सत्ताधारी और मजबूत राजनीतिक दलों के प्रभाव में भी रहता है।ये दल धन के बल पर लोक रूझान को अपने पक्ष में दिखाने में सफल हो जाते हैं और सम्पूर्ण चुनावी प्रक्रिया को ही धता बता देते हैं। इस प्रकार सत्ता एवं धन इन सर्वेक्षणों को प्रभावित करते है। इन्हें दूध का धुला नहीं कहा जा सकता। भारत जैसे लोकतान्त्रिक राष्ट्र में जहाँ जनता निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से अपना मत अभिव्यक्त करती है, वहाँ इन सर्वेक्षणों के औचित्य-अनौचित्य पर विचार किया जाना चाहिए। न्यायालय को संविधान के अनुसार चलने की बाध्यता है लेकिन संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। वह अपने अधिकारों का प्रयोग करके कोई सार्थक प्रयास कर सकती है।
“सम्पूर्ण चुनावी प्रक्रिया को ही धता बता देते हैं। इस कथन का भाव है-
  1. A
    विश्लेषणात्मक         
  2. B
    प्रतिक्रियात्मक
  3. C
    उपहासात्मक 
  4. D
    सकारात्मक
प्रश्न 14Single Answer
गद्यांश :
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल का लोकतंत्र में क्या महत्त्व हैं? यह प्रश्न विचारणीय है। लोकतंत्र-रूपी वृक्ष जनता द्वारा बोया और सींचा जाता है, इसके पल्लवन एवं पुष्पन में मीडिया की विशेष भूमिका होती हैं। भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। लोकतान्त्रिक राष्ट्र में नागरिकों को विशिष्ट अधिकार और स्वतंत्रताएँ प्राप्त होती हैं।भारतीय संविधान ने भी अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है लेकिन जनता के व्यापक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली स्वतन्त्रता बाधित भी की जानी चाहिए।
भारत जैसे अल्पशिक्षित देश में इस प्रकार के सर्वेक्षण अनुचित हैं। देश की आम जनता पर मीडिया द्वारा किए जाने वाले चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और चुनाव के तुरन्त पश्चात् किए जाने वाले एक्जिट पोल का भ्रामक प्रभाव पड़ता है। वह विजयी होती पार्टी की ओर झुक जाती है। आज भी सामान्य लोगों के बीच में आम धारणा है कि हम धारणा है कि हम अपना वोट खराब नहीं करेंगे, जीतते प्रत्याशी को ही वोट देंगे ।वर्तमान में बाजारवाद अपने उत्कर्ष पर है और मीडिया इसके दुष्प्रभाव से अनछुआ नहीं है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आज मीडिया भी अधिकाधिक संख्या में प्रसार और धन पाने को बुभुक्षित है। मीडिया सत्ताधारी और मजबूत राजनीतिक दलों के प्रभाव में भी रहता है।ये दल धन के बल पर लोक रूझान को अपने पक्ष में दिखाने में सफल हो जाते हैं और सम्पूर्ण चुनावी प्रक्रिया को ही धता बता देते हैं। इस प्रकार सत्ता एवं धन इन सर्वेक्षणों को प्रभावित करते है। इन्हें दूध का धुला नहीं कहा जा सकता। भारत जैसे लोकतान्त्रिक राष्ट्र में जहाँ जनता निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से अपना मत अभिव्यक्त करती है, वहाँ इन सर्वेक्षणों के औचित्य-अनौचित्य पर विचार किया जाना चाहिए। न्यायालय को संविधान के अनुसार चलने की बाध्यता है लेकिन संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। वह अपने अधिकारों का प्रयोग करके कोई सार्थक प्रयास कर सकती है।
गद्यांश से निष्कर्ष निकलता है कि-
  1. A
    निर्वाचन में मीडिया की भूमिका संदिग्ध रहती है
  2. B
    भारत में चुनाव पूर्व सर्वेक्षण निरर्थक है
  3. C
    चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल प्रतिबन्धित  हो
  4. D
    मीडिया धन से प्रभावित होता है
प्रश्न 15Single Answer
गद्यांश :
चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल का लोकतंत्र में क्या महत्त्व हैं? यह प्रश्न विचारणीय है। लोकतंत्र-रूपी वृक्ष जनता द्वारा बोया और सींचा जाता है, इसके पल्लवन एवं पुष्पन में मीडिया की विशेष भूमिका होती हैं। भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। लोकतान्त्रिक राष्ट्र में नागरिकों को विशिष्ट अधिकार और स्वतंत्रताएँ प्राप्त होती हैं।भारतीय संविधान ने भी अनुच्छेद 19(1) के अन्तर्गत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है लेकिन जनता के व्यापक हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली स्वतन्त्रता बाधित भी की जानी चाहिए।
    भारत जैसे अल्पशिक्षित देश में इस प्रकार के सर्वेक्षण अनुचित हैं। देश की आम जनता पर मीडिया द्वारा किए जाने वाले चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और चुनाव के तुरन्त पश्चात् किए जाने वाले एक्जिट पोल का भ्रामक प्रभाव पड़ता है। वह विजयी होती पार्टी की ओर झुक जाती है। आज भी सामान्य लोगों के बीच में आम धारणा है कि हम धारणा है कि हम अपना वोट खराब नहीं करेंगे, जीतते प्रत्याशी को ही वोट देंगे ।वर्तमान में बाजारवाद अपने उत्कर्ष पर है और मीडिया इसके दुष्प्रभाव से अनछुआ नहीं है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आज मीडिया भी अधिकाधिक संख्या में प्रसार और धन पाने को बुभुक्षित है। मीडिया सत्ताधारी और मजबूत राजनीतिक दलों के प्रभाव में भी रहता है।ये दल धन के बल पर लोक रूझान को अपने पक्ष में दिखाने में सफल हो जाते हैं और सम्पूर्ण चुनावी प्रक्रिया को ही धता बता देते हैं। इस प्रकार सत्ता एवं धन इन सर्वेक्षणों को प्रभावित करते है। इन्हें दूध का धुला नहीं कहा जा सकता। भारत जैसे लोकतान्त्रिक राष्ट्र में जहाँ जनता निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से अपना मत अभिव्यक्त करती है, वहाँ इन सर्वेक्षणों के औचित्य-अनौचित्य पर विचार किया जाना चाहिए न्यायालय को संविधान के अनुसार चलने की बाध्यता है लेकिन संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। वह अपने अधिकारों का प्रयोग करके कोई सार्थक प्रयास कर सकती है।
उपरोक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक बताइए-
  1. A
    चुनाव पूर्व सर्वेक्षण      
  2. B
    चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एवं एक्जिट पोल
  3. C
    चुनाव प्रक्रिया
  4. D
    लोकतंत्र और चुनाव सर्वेक्षण
प्रश्न 16Single Answer
फोटो ब्लीडिंग का अर्थ है :
  1. A
    फोटो क्रोपिंग
  2. B
    फोटो स्थापन
  3. C
    फोटो कटिंग
  4. D
    फोटो रंगों का समायोजन
प्रश्न 17Single Answer
संचार रणनीति बनाते समय पुनर्निवेशन अध्ययन किसके द्वारा किया जाता है ?
  1. A
    श्रोता
  2. B
    संचारक
  3. C
    सैटेलाइट
  4. D
    संचार माध्यम
प्रश्न 18Single Answer
किस भाषाई पत्रों का सबसे अधिक वितरण है ?
  1. A
    अंग्रेजी
  2. B
    हिन्दी
  3. C
    बंगाली
  4. D
    तमिल
प्रश्न 19Single Answer
शिक्षा के माध्यम से कल्याण होता है ?
  1. A
    समाज के सभी वर्गों का
  2. B
    आदर्श परिवार का
  3. C
    मनुष्य के व्यक्तित्व का
  4. D
    छात्र व छात्राओं का
प्रश्न 20Single Answer
आत्म - संप्रेषण की कहते हैं :
  1. A
    संगठनात्मक संप्रेषण
  2. B
    अफवाह संप्रेषण
  3. C
    अंतर्वैयक्तिक संप्रेषण
  4. D
    अंत:वैयक्तिक संप्रेषण
प्रश्न 21Single Answer
‘SITE’ पद का पूर्ण रूप है :
  1. A
    सैटलाइट इण्डियन टेलीविजन एक्सपेरीमेन्ट
  2. B
    सैटलाइट इन्टरनेशनल टेलीविजन एक्सपेरीमेन्ट
  3. C
    सैटलाइट इन्सट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरीमेन्ट
  4. D
    सैटलाइट इन्सट्रक्शनल टीचर्स एजुकेशन
प्रश्न 22Single Answer
इस श्रृंखला में अगली कौन - सी संख्या आयेगी ?
2 , 5 , 9 , 19 , 37 ,.................. 
  1. A
    76
  2. B
    74
  3. C
    75
  4. D
    50
प्रश्न 23Single Answer
प्रौढ़ शिक्षा किन व्यक्तियों के अधिकार में होनी चाहिए ?
  1. A
    सरकार के हाथ में
  2. B
    शिक्षित व्यक्तियों के हाथ में
  3. C
    गैर-सरकारी समितियों के हाथ में
  4. D
    उपरोक्त सभी के हाथ में
प्रश्न 24Single Answer
एक प्रदत्त कूट में यदि '367' का अर्थ ’मैं प्रसन्न हूं , '748' का अर्थ है 'आप उदास हैं'  और '469' का अर्थ है 'प्रसन्न और उदास' । तो निम्नलिखित में से कूट में और किससे प्रदर्शित होगा ?
  1. A
    3 
  2. B
    6
  3. C
    9
  4. D
    4
प्रश्न 25Single Answer
निम्नलिखित वर्गीकरण का आधार है : 
'पशु' 'आदमी', 'घर', 'किताब' और 'विद्यार्थी' 
  1. A
    निश्चित वर्णन
  2. B
    व्यक्तिवाचक नाम
  3. C
    वर्णनात्मक संक्षिप्त वाक्य
  4. D
    सर्वसामान्य नाम
प्रश्न 26Single Answer
गद्यांश :
नीचे दिया गया परिच्छेद ध्यानपूर्वक पढ़िए और परिच्छेद के बारे में अपनी समझ के आधार पर  का उत्तर दीजिये : 
सभी इतिहासकार ग्रन्थ चाहे वो निजी पत्र, सरकारी अभिलेखया पल्ली जन्म सूचियां या कुछ भी हों , के निर्वचक होते हैं । अधिकांश प्रकार के इतिहासकारों के लिये, स्वयं ग्रन्थों को छोड़कर अन्य किसी को समझने का यह सिर्फ आवश्यक माध्यम है, जैसे कि राजनीतिक कार्रवाई  या ऐतिहासिक प्रवृत्ति। जबकि , बौद्धिक इतिहासकार के लिये , उसके चयनित ग्रन्थ को ही पूर्णतया समझना पूछताठ का लक्ष्य होता   है । निस्संदेह , बौद्धिक इतिहास,  अन्य विषयों,  जो अपने ही उद्देश्यों के लिये ग्रन्थों का आदतन निर्वचन कर रहे हैं और तर्कणा जो निष्कर्ष को दिखावटी रूप से क्षेत्र के साथ जोड़ती है , पर फोकस करके निष्कर्ष निकालने को विशेषतः प्रवृत होता है । इसके अतिरिक्त , सम्बन्धित उप -विषय क्षेत्रों के साथ सीमाएं बदल या खिसक रही हैं और अस्पष्ट हैं कला का इतिहास और विज्ञान का इतिहास दोनों कुछ स्वायत्तता कादावा करते हैं , आंशिक रूप से इसलिये क्योंकि उन्हें विशेषित तकनीकि कौशलों की जरूरत हैं , परन्तु दोनों को व्यापक बौद्धिक इतिहास के भाग के रूप में भी देखाजा सकता है , जैसा कि स्पष्ट होता है जब हम ब्रह्माण्डकीय धारणाओं अथवा  कालिक नैतिक आदर्शों के बारे में ज्ञान के सर्व सामान्य स्टॉक के बारे में विचार करते हैं ।  सभी इतिहासकारों की तरह से ,  बौद्धिक इतिहासकार ’’विधियों’’ का उत्पादक होने के बजाय उनका उपभोक्ता होता है । उसकी विशिष्टता विगतकाल के उस पहलू जिस पर वह प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या तकनीकों के समूह पर एकमात्र स्वामित्व होने में स्थित नहीं है । यह कह लेने के बाद, यह जश्र प्रतीत होता है कि ’’बौद्धिक इतिहास’’ का नाम गलतफहमी के अनानुपातिक भाग को आकर्षित करता है । यह कहा जाता है कि बौद्धिक इतिहास किसी ऐसी चीज का इतिहास है जिसे कभी महत्व नहीं दिया जाता था। राजनीतिक इतिहासकारों के ऐतिहासिक स्वामित्व पर दीर्घकालीन प्रभुत्व एक प्रकार की विषयासक्ति (फिलिस्तिनिज्म) , अनकही घारणा की सत्ता और उसके प्रयोग  का ही वास्तव में महत्व था, को जन्म देता है। इस दावे से पूर्वाग्रह संबलित हुआ कि राजनीतिक कार्रवाई वास्तव में कभी भी उन सिद्धान्तों या विचारों जो  ’’ज्यादा फ्लैपडुडल’’ भे का परिणाम नहीं िी । इस धारणा की बपौती अभी भी इन अपेक्षित विचारों की प्रवृति में दृष्टिगोचर होती है , कि इससे पहले कि राजनीतिक वर्ग को बौद्धिक सत्कार के योग्य समझा जा सके अनुज्ञापत्र प्राप्त हो , मानो इसके कुछ कारण हैं कि क्यों कला या विज्ञान , दर्शनशास्त्र या साहित्य का इतिहास दलों या संसदों के इतिहास की तुलना में दिलचस्पी और महत्व का हैं । शायद हाल ही के वर्षों  में इस फिलीस्तिनिज्म (विषयासक्ति) की दर्पण - प्रतिच्छाया इस दावे में ज्यादा सर्वसामान्य रही है कि किसी के विचार विधिवत अभिव्यक्ति के अथवा दुनियादारी के हैं का कोई महत्व नहीं है ,मानो वह सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग के विचार हैं ।   
बौद्धिक इतिहासकार का लक्ष्य निम्नलिखित में से किसे समझने का होता है ?
  1. A
    उसके अपने विशेष ग्रन्थ 
  2. B
    राजनीतिक कार्रवाइयां 
  3. C
    ऐतिहासिक प्रवृतियां 
  4. D
    उसकी पूछताछ  
प्रश्न 27Single Answer
गद्यांश :
नीचे दिया गया परिच्छेद ध्यानपूर्वक पढ़िए और परिच्छेद के बारे में अपनी समझ के आधार पर  का उत्तर दीजिये : 
सभी इतिहासकार ग्रन्थ चाहे वो निजी पत्र, सरकारी अभिलेखया पल्ली जन्म सूचियां या कुछ भी हों , के निर्वचक होते हैं । अधिकांश प्रकार के इतिहासकारों के लिये, स्वयं ग्रन्थों को छोड़कर अन्य किसी को समझने का यह सिर्फ आवश्यक माध्यम है, जैसे कि राजनीतिक कार्रवाई  या ऐतिहासिक प्रवृत्ति। जबकि , बौद्धिक इतिहासकार के लिये , उसके चयनित ग्रन्थ को ही पूर्णतया समझना पूछताठ का लक्ष्य होता   है । निस्संदेह , बौद्धिक इतिहास,  अन्य विषयों,  जो अपने ही उद्देश्यों के लिये ग्रन्थों का आदतन निर्वचन कर रहे हैं और तर्कणा जो निष्कर्ष को दिखावटी रूप से क्षेत्र के साथ जोड़ती है , पर फोकस करके निष्कर्ष निकालने को विशेषतः प्रवृत होता है । इसके अतिरिक्त , सम्बन्धित उप -विषय क्षेत्रों के साथ सीमाएं बदल या खिसक रही हैं और अस्पष्ट हैं कला का इतिहास और विज्ञान का इतिहास दोनों कुछ स्वायत्तता कादावा करते हैं , आंशिक रूप से इसलिये क्योंकि उन्हें विशेषित तकनीकि कौशलों की जरूरत हैं , परन्तु दोनों को व्यापक बौद्धिक इतिहास के भाग के रूप में भी देखाजा सकता है , जैसा कि स्पष्ट होता है जब हम ब्रह्माण्डकीय धारणाओं अथवा  कालिक नैतिक आदर्शों के बारे में ज्ञान के सर्व सामान्य स्टॉक के बारे में विचार करते हैं ।  सभी इतिहासकारों की तरह से ,  बौद्धिक इतिहासकार ’’विधियों’’ का उत्पादक होने के बजाय उनका उपभोक्ता होता है । उसकी विशिष्टता विगतकाल के उस पहलू जिस पर वह प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या तकनीकों के समूह पर एकमात्र स्वामित्व होने में स्थित नहीं है । यह कह लेने के बाद, यह जश्र प्रतीत होता है कि ’’बौद्धिक इतिहास’’ का नाम गलतफहमी के अनानुपातिक भाग को आकर्षित करता है । यह कहा जाता है कि बौद्धिक इतिहास किसी ऐसी चीज का इतिहास है जिसे कभी महत्व नहीं दिया जाता था। राजनीतिक इतिहासकारों के ऐतिहासिक स्वामित्व पर दीर्घकालीन प्रभुत्व एक प्रकार की विषयासक्ति (फिलिस्तिनिज्म) , अनकही घारणा की सत्ता और उसके प्रयोग  का ही वास्तव में महत्व था, को जन्म देता है। इस दावे से पूर्वाग्रह संबलित हुआ कि राजनीतिक कार्रवाई वास्तव में कभी भी उन सिद्धान्तों या विचारों जो  ’’ज्यादा फ्लैपडुडल’’ भे का परिणाम नहीं  । इस धारणा की बपौती अभी भी इन अपेक्षित विचारों की प्रवृति में दृष्टिगोचर होती है , कि इससे पहले कि राजनीतिक वर्ग को बौद्धिक सत्कार के योग्य समझा जा सके अनुज्ञापत्र प्राप्त हो , मानो इसके कुछ कारण हैं कि क्यों कला या विज्ञान , दर्शनशास्त्र या साहित्य का इतिहास दलों या संसदों के इतिहास की तुलना में दिलचस्पी और महत्व का हैं । शायद हाल ही के वर्षों  में इस फिलीस्तिनिज्म (विषयासक्ति) की दर्पण - प्रतिच्छाया इस दावे में ज्यादा सर्वसामान्य रही है कि किसी के विचार विधिवत अभिव्यक्ति के अथवा दुनियादारी के हैं का कोई महत्व नहीं है ,मानो वह सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग के विचार हैं ।   
बौद्धिक इतिहासकार किसके एकमात्र स्वामित्व का दवा नहीं है ?
  1. A
    निष्कर्ष 
  2. B
    प्रमाण का कोई भी संग्रह  
  3. C
    विशिष्टता  
  4. D
    आदतन निर्वचन   
प्रश्न 28Single Answer
गद्यांश :
नीचे दिया गया परिच्छेद ध्यानपूर्वक पढ़िए और परिच्छेद के बारे में अपनी समझ के आधार पर  का उत्तर दीजिये : 
सभी इतिहासकार ग्रन्थ चाहे वो निजी पत्र, सरकारी अभिलेखया पल्ली जन्म सूचियां या कुछ भी हों , के निर्वचक होते हैं । अधिकांश प्रकार के इतिहासकारों के लिये, स्वयं ग्रन्थों को छोड़कर अन्य किसी को समझने का यह सिर्फ आवश्यक माध्यम है, जैसे कि राजनीतिक कार्रवाई  या ऐतिहासिक प्रवृत्ति। जबकि , बौद्धिक इतिहासकार के लिये , उसके चयनित ग्रन्थ को ही पूर्णतया समझना पूछताठ का लक्ष्य होता   है । निस्संदेह , बौद्धिक इतिहास,  अन्य विषयों,  जो अपने ही उद्देश्यों के लिये ग्रन्थों का आदतन निर्वचन कर रहे हैं और तर्कणा जो निष्कर्ष को दिखावटी रूप से क्षेत्र के साथ जोड़ती है , पर फोकस करके निष्कर्ष निकालने को विशेषतः प्रवृत होता है । इसके अतिरिक्त , सम्बन्धित उप -विषय क्षेत्रों के साथ सीमाएं बदल या खिसक रही हैं और अस्पष्ट हैं कला का इतिहास और विज्ञान का इतिहास दोनों कुछ स्वायत्तता कादावा करते हैं , आंशिक रूप से इसलिये क्योंकि उन्हें विशेषित तकनीकि कौशलों की जरूरत हैं , परन्तु दोनों को व्यापक बौद्धिक इतिहास के भाग के रूप में भी देखाजा सकता है , जैसा कि स्पष्ट होता है जब हम ब्रह्माण्डकीय धारणाओं अथवा  कालिक नैतिक आदर्शों के बारे में ज्ञान के सर्व सामान्य स्टॉक के बारे में विचार करते हैं ।  सभी इतिहासकारों की तरह से ,  बौद्धिक इतिहासकार ’’विधियों’’ का उत्पादक होने के बजाय उनका उपभोक्ता होता है । उसकी विशिष्टता विगतकाल के उस पहलू जिस पर वह प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या तकनीकों के समूह पर एकमात्र स्वामित्व होने में स्थित नहीं है । यह कह लेने के बाद, यह जश्र प्रतीत होता है कि ’’बौद्धिक इतिहास’’ का नाम गलतफहमी के अनानुपातिक भाग को आकर्षित करता है । यह कहा जाता है कि बौद्धिक इतिहास किसी ऐसी चीज का इतिहास है जिसे कभी महत्व नहीं दिया जाता था। राजनीतिक इतिहासकारों के ऐतिहासिक स्वामित्व पर दीर्घकालीन प्रभुत्व एक प्रकार की विषयासक्ति (फिलिस्तिनिज्म) , अनकही घारणा की सत्ता और उसके प्रयोग  का ही वास्तव में महत्व था, को जन्म देता है। इस दावे से पूर्वाग्रह संबलित हुआ कि राजनीतिक कार्रवाई वास्तव में कभी भी उन सिद्धान्तों या विचारों जो  ’’ज्यादा फ्लैपडुडल’’ भे का परिणाम नहीं  । इस धारणा की बपौती अभी भी इन अपेक्षित विचारों की प्रवृति में दृष्टिगोचर होती है , कि इससे पहले कि राजनीतिक वर्ग को बौद्धिक सत्कार के योग्य समझा जा सके अनुज्ञापत्र प्राप्त हो , मानो इसके कुछ कारण हैं कि क्यों कला या विज्ञान , दर्शनशास्त्र या साहित्य का इतिहास दलों या संसदों के इतिहास की तुलना में दिलचस्पी और महत्व का हैं । शायद हाल ही के वर्षों  में इस फिलीस्तिनिज्म (विषयासक्ति) की दर्पण - प्रतिच्छाया इस दावे में ज्यादा सर्वसामान्य रही है कि किसी के विचार विधिवत अभिव्यक्ति के अथवा दुनियादारी के हैं का कोई महत्व नहीं है ,मानो वह सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग के विचार हैं ।   
बौद्धिक इतिहासकार के बारे में गलतमियां किससे उत्पन्न होती हैं ?
  1. A
    तकनीकों का समूह 
  2. B
    ज्ञान का सामान्य स्टॉक  
  3. C
    राजनीतिक इतिहासकारों का प्रभुत्व 
  4. D
    ब्रह्माण्डकीय धारणाएं 
प्रश्न 29Single Answer
गद्यांश :
नीचे दिया गया परिच्छेद ध्यानपूर्वक पढ़िए और परिच्छेद के बारे में अपनी समझ के आधार पर  का उत्तर दीजिये : 
सभी इतिहासकार ग्रन्थ चाहे वो निजी पत्र, सरकारी अभिलेखया पल्ली जन्म सूचियां या कुछ भी हों , के निर्वचक होते हैं । अधिकांश प्रकार के इतिहासकारों के लिये, स्वयं ग्रन्थों को छोड़कर अन्य किसी को समझने का यह सिर्फ आवश्यक माध्यम है, जैसे कि राजनीतिक कार्रवाई  या ऐतिहासिक प्रवृत्ति। जबकि , बौद्धिक इतिहासकार के लिये , उसके चयनित ग्रन्थ को ही पूर्णतया समझना पूछताठ का लक्ष्य होता   है । निस्संदेह , बौद्धिक इतिहास,  अन्य विषयों,  जो अपने ही उद्देश्यों के लिये ग्रन्थों का आदतन निर्वचन कर रहे हैं और तर्कणा जो निष्कर्ष को दिखावटी रूप से क्षेत्र के साथ जोड़ती है , पर फोकस करके निष्कर्ष निकालने को विशेषतः प्रवृत होता है । इसके अतिरिक्त , सम्बन्धित उप -विषय क्षेत्रों के साथ सीमाएं बदल या खिसक रही हैं और अस्पष्ट हैं कला का इतिहास और विज्ञान का इतिहास दोनों कुछ स्वायत्तता कादावा करते हैं , आंशिक रूप से इसलिये क्योंकि उन्हें विशेषित तकनीकि कौशलों की जरूरत हैं , परन्तु दोनों को व्यापक बौद्धिक इतिहास के भाग के रूप में भी देखाजा सकता है , जैसा कि स्पष्ट होता है जब हम ब्रह्माण्डकीय धारणाओं अथवा  कालिक नैतिक आदर्शों के बारे में ज्ञान के सर्व सामान्य स्टॉक के बारे में विचार करते हैं ।  सभी इतिहासकारों की तरह से ,  बौद्धिक इतिहासकार ’’विधियों’’ का उत्पादक होने के बजाय उनका उपभोक्ता होता है । उसकी विशिष्टता विगतकाल के उस पहलू जिस पर वह प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या तकनीकों के समूह पर एकमात्र स्वामित्व होने में स्थित नहीं है । यह कह लेने के बाद, यह जश्र प्रतीत होता है कि ’’बौद्धिक इतिहास’’ का नाम गलतफहमी के अनानुपातिक भाग को आकर्षित करता है । यह कहा जाता है कि बौद्धिक इतिहास किसी ऐसी चीज का इतिहास है जिसे कभी महत्व नहीं दिया जाता था। राजनीतिक इतिहासकारों के ऐतिहासिक स्वामित्व पर दीर्घकालीन प्रभुत्व एक प्रकार की विषयासक्ति (फिलिस्तिनिज्म) , अनकही घारणा की सत्ता और उसके प्रयोग  का ही वास्तव में महत्व था, को जन्म देता है। इस दावे से पूर्वाग्रह संबलित हुआ कि राजनीतिक कार्रवाई वास्तव में कभी भी उन सिद्धान्तों या विचारों जो  ’’ज्यादा फ्लैपडुडल’’ भे का परिणाम नहीं  । इस धारणा की बपौती अभी भी इन अपेक्षित विचारों की प्रवृति में दृष्टिगोचर होती है , कि इससे पहले कि राजनीतिक वर्ग को बौद्धिक सत्कार के योग्य समझा जा सके अनुज्ञापत्र प्राप्त हो , मानो इसके कुछ कारण हैं कि क्यों कला या विज्ञान , दर्शनशास्त्र या साहित्य का इतिहास दलों या संसदों के इतिहास की तुलना में दिलचस्पी और महत्व का हैं । शायद हाल ही के वर्षों  में इस फिलीस्तिनिज्म (विषयासक्ति) की दर्पण - प्रतिच्छाया इस दावे में ज्यादा सर्वसामान्य रही है कि किसी के विचार विधिवत अभिव्यक्ति के अथवा दुनियादारी के हैं का कोई महत्व नहीं है ,मानो वह सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग के विचार हैं ।   
विषयासक्तिवाद (फिलिस्तिनिज्म) क्या है ?
  1. A
    पूर्वाग्रह का पुनर्बलित होना 
  2. B
    कारणों को गढ़ना 
  3. C
    भूस्वामियों का प्रभाव 
  4. D
    यह धारणा कि सत्ता और उसके प्रयोग का महत्व होता है   
प्रश्न 30Single Answer
गद्यांश :
नीचे दिया गया परिच्छेद ध्यानपूर्वक पढ़िए और परिच्छेद के बारे में अपनी समझ के आधार पर  का उत्तर दीजिये : 
सभी इतिहासकार ग्रन्थ चाहे वो निजी पत्र, सरकारी अभिलेखया पल्ली जन्म सूचियां या कुछ भी हों , के निर्वचक होते हैं । अधिकांश प्रकार के इतिहासकारों के लिये, स्वयं ग्रन्थों को छोड़कर अन्य किसी को समझने का यह सिर्फ आवश्यक माध्यम है, जैसे कि राजनीतिक कार्रवाई  या ऐतिहासिक प्रवृत्ति। जबकि , बौद्धिक इतिहासकार के लिये , उसके चयनित ग्रन्थ को ही पूर्णतया समझना पूछताठ का लक्ष्य होता   है । निस्संदेह , बौद्धिक इतिहास,  अन्य विषयों,  जो अपने ही उद्देश्यों के लिये ग्रन्थों का आदतन निर्वचन कर रहे हैं और तर्कणा जो निष्कर्ष को दिखावटी रूप से क्षेत्र के साथ जोड़ती है , पर फोकस करके निष्कर्ष निकालने को विशेषतः प्रवृत होता है । इसके अतिरिक्त , सम्बन्धित उप -विषय क्षेत्रों के साथ सीमाएं बदल या खिसक रही हैं और अस्पष्ट हैं कला का इतिहास और विज्ञान का इतिहास दोनों कुछ स्वायत्तता कादावा करते हैं , आंशिक रूप से इसलिये क्योंकि उन्हें विशेषित तकनीकि कौशलों की जरूरत हैं , परन्तु दोनों को व्यापक बौद्धिक इतिहास के भाग के रूप में भी देखाजा सकता है , जैसा कि स्पष्ट होता है जब हम ब्रह्माण्डकीय धारणाओं अथवा  कालिक नैतिक आदर्शों के बारे में ज्ञान के सर्व सामान्य स्टॉक के बारे में विचार करते हैं ।  सभी इतिहासकारों की तरह से ,  बौद्धिक इतिहासकार ’’विधियों’’ का उत्पादक होने के बजाय उनका उपभोक्ता होता है । उसकी विशिष्टता विगतकाल के उस पहलू जिस पर वह प्रकाश डालने की कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या कोशिश कर रहा है , में स्थित है और प्रमाण के समूह या तकनीकों के समूह पर एकमात्र स्वामित्व होने में स्थित नहीं है । यह कह लेने के बाद, यह जश्र प्रतीत होता है कि ’’बौद्धिक इतिहास’’ का नाम गलतफहमी के अनानुपातिक भाग को आकर्षित करता है । यह कहा जाता है कि बौद्धिक इतिहास किसी ऐसी चीज का इतिहास है जिसे कभी महत्व नहीं दिया जाता था। राजनीतिक इतिहासकारों के ऐतिहासिक स्वामित्व पर दीर्घकालीन प्रभुत्व एक प्रकार की विषयासक्ति (फिलिस्तिनिज्म) , अनकही घारणा की सत्ता और उसके प्रयोग  का ही वास्तव में महत्व था, को जन्म देता है। इस दावे से पूर्वाग्रह संबलित हुआ कि राजनीतिक कार्रवाई वास्तव में कभी भी उन सिद्धान्तों या विचारों जो  ’’ज्यादा फ्लैपडुडल’’ भे का परिणाम नहीं  । इस धारणा की बपौती अभी भी इन अपेक्षित विचारों की प्रवृति में दृष्टिगोचर होती है , कि इससे पहले कि राजनीतिक वर्ग को बौद्धिक सत्कार के योग्य समझा जा सके अनुज्ञापत्र प्राप्त हो , मानो इसके कुछ कारण हैं कि क्यों कला या विज्ञान , दर्शनशास्त्र या साहित्य का इतिहास दलों या संसदों के इतिहास की तुलना में दिलचस्पी और महत्व का हैं । शायद हाल ही के वर्षों  में इस फिलीस्तिनिज्म (विषयासक्ति) की दर्पण - प्रतिच्छाया इस दावे में ज्यादा सर्वसामान्य रही है कि किसी के विचार विधिवत अभिव्यक्ति के अथवा दुनियादारी के हैं का कोई महत्व नहीं है ,मानो वह सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग के विचार हैं ।   
ब्रह्माण्डकीय धारणाओं या कालिक नैतिक विचारों का ज्ञान किसके अंश के रूप में निकाला जा सकता है ?
  1. A
    साहित्यिक आलोचना 
  2. B
    विज्ञान का इतिहास 
  3. C
    दर्शनशास्त्र का इतिहास 
  4. D
    बौद्धिक इतिहास   
प्रश्न 31Single Answer
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: इंटरनेट वर्ल्ड वाइड वेब पर सामान्यतः उपयोग की जाने वाली सेवा है।
कथन II: HTTP वह प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर इंटरनेट पर एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए करते हैं।
उपरोक्त कथनों के आधार पर, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
  1. A
    कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
  2. B
    कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
  3. C
    कथन I सत्य है लेकिन कथन II असत्य है।
  4. D
    कथन I गलत है लेकिन कथन II सत्य है।
प्रश्न 32Single Answer
नकारात्मक संचारक आमतौर पर व्यक्त करते हैं
(A) मौखिक कोमलता
(B) आशावाद
(C) निराशावाद
(D) नाराजगी
(E) अविश्वास
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    केवल A, B और C
  2. B
    केवल B, C और D
  3. C
    केवल C, D और E
  4. D
    केवल A, B और E
प्रश्न 33Single Answer
नीचे दिए गए शब्द AE का सही क्रम पहचाने जो कीबोर्ड के लिए एक ऑपरेशन का वर्णन करने वाले पैराग्राफ को पूरा करता है। कंप्यूटर कीबोर्ड में कुंजियों के नीचे एक कुंजी मैट्रिक्स होती है, जब कि 'C' कुंजी को दबाया जाता है, तो यह एक स्विच दबाता है जो एक ___________ को पूरा करता है। यह __________ को अनुसरण करने की अनुमति देता है। दबाए गए कुंजी का स्थान ______ है। दबाए गए कुंजी के लिए _________ मान खोजने के लिए दबाए गए कुंजी के स्थान की तुलना ________ मानचित्र से की जाती है।
(A) बाइनरी
(B) गणना
(C) चरित्र
(D) सर्किट
(E) वर्तमान
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    E, D, B, C और A
  2. B
    D, E, B, C और A
  3. C
    C, D, B, E और A
  4. D
    A, E, B, C और D
प्रश्न 34Single Answer
एक शोधकर्ता विभिन्न नमूनों के नमूना सहसंबंध गुणांक के लिए निम्नलिखित p-मान प्राप्त करता है। इनमें से किसे 1% महत्व के स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है?
(A) 0.004
(B) 0.99
(C) 0.995
(D) 0.001
(E) 0.1
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    केवल B और C
  2. B
    केवल B, D और E
  3. C
    केवल A, और D
  4. D
    केवल B, C और E
प्रश्न 35Single Answer
निम्नलिखित तर्क में ग़लतफ़हमी की पहचान करें: "एलन लंबा, काला और सुंदर है और उसकी नीली आँखें हैं। बिल भी लंबा, काला और सुंदर है"।
  1. A
    असंगतता
  2. B
    कमजोर सादृश्य
  3. C
    फिसलन ढलान
  4. D
    जल्दबाजी में सामान्यीकरण
प्रश्न 36Single Answer
जैन दर्शन के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा अप्रत्यक्ष ज्ञान का रूप नहीं है?
  1. A
    स्मृति
  2. B
    प्रत्यभिज्ञा
  3. C
    तारका
  4. D
    नया
प्रश्न 37Single Answer
मान लीजिए एक आदमी 4 घंटे में नदी में 12 किमी धारा के प्रतिकूल और 20 किमी धारा के अनुकूल तैरता है। यदि वह 4 घंटे में 18 किमी धारा के प्रतिकूल और 10 किमी धारा के अनुकूल तैरता है, तो वह जिस गति से स्थिर पानी में तैरता है वह है:
  1. A
    4 किमी/घंटा
  2. B
    6 किमी/घंटा
  3. C
    8 किमी/घंटा
  4. D
    10 किमी/घंटा
प्रश्न 38Single Answer
भारत में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) कब शुरू की गई थी?
  1. A
    2008
  2. B
    1991
  3. C
    2006
  4. D
    2014
प्रश्न 39Single Answer
निम्नलिखित में से कौन वैश्विक स्तर की घटनाएं हैं?
(A) ओजोन परत का क्षरण
(B) वैश्विक चेतावनी
(C) जंगल की आग
(D) समुद्र स्तर में वृद्धि
(E) एयर पुल्ल्यूशन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    केवल A, C और D
  2. B
    केवल A, B, C और D
  3. C
    केवल B, C और E
  4. D
    केवल A, B और D
प्रश्न 40Single Answer
यदि (L) आधार - M संख्या प्रणाली में एक संख्या L को दर्शाता है, तो आधार -10 संख्या प्रणाली में परिवर्तित होने पर, निम्नलिखित संख्या AD के सही अवरोही क्रम की पहचान करें।
(A) (9C)16
(B) (233)8
(C) (313)7
(D) (10011110)2
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    (C), (D), (B), (A)
  2. B
    (B), (C), (A), (D)
  3. C
    (D), (C), (A), (B)
  4. D
    (D), (C), (B), (A)
प्रश्न 41Single Answer
निम्नलिखित से क्या अनुमान लगाया जा सकता है?
"क्योंकि x3 और y = 5, तो x + y = 8" यह एक
  1. A
    उन्मूलन पर आधारित निगमनात्मक तर्क
  2. B
    गणित पर आधारित निगमनात्मक तर्क
  3. C
    प्राधिकरण से आगमनात्मक तर्क
  4. D
    दान के सिद्धांत से आगमनात्मक तर्क
प्रश्न 42Single Answer
निम्नलिखित में से कौन आयुष स्नातक शिक्षा के भाग हैं?
(A) सिद्ध
(B) सोवा-रिग्पा
(C) योग-शास्त्र
(D) होम्योपैथी
(E) संजीवनी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    केवल A, B और E
  2. B
    केवल B, C और D
  3. C
    केवल A, B और D
  4. D
    केवल A, C और E
प्रश्न 43Single Answer
यदि वर्ष 2023 में सभी छह शहरों में पाठकों की कुल संख्या 50,000 थी, तो उसी वर्ष ठीक ________ शहरों में पाठकों की संख्या 7,400 से अधिक थी।
  1. A
    2
  2. B
    3
  3. C
    4
  4. D
    5
प्रश्न 44Single Answer
यदि वर्ष 2019 में शहर-A के पाठकों की संख्या का 2023 में पाठकों की संख्या से अनुपात 2:5 था, तो वर्ष 2019 में सभी छह शहरों के पाठकों की संख्या का 2023 में पाठकों की संख्या से अनुपात क्या था?
  1. A
    3:5
  2. B
    4:5
  3. C
    4:9
  4. D
    2:5
प्रश्न 45Single Answer
यदि वर्ष 2019 और 2023 में शहर-D के पाठकों की संख्या क्रमशः 77,400 और 1,14,000 थी, तो वर्ष 2019 और 2023 में शहर-F के पाठकों की संख्या के बीच क्या अंतर है?
  1. A
    24,800
  2. B
    27,200
  3. C
    28,400
  4. D
    33,600
प्रश्न 46Single Answer
यदि वर्ष 2019 में CT-C के पाठकों की संख्या और वर्ष 2023 में सिटी-E के पाठकों की संख्या क्रमशः 73,100 और 51,300 थी, तो वर्ष 2023 में सिटी-B के पाठकों की संख्या 2019 की तुलना में लगभग _______ % अधिक थी।
  1. A
    53.7
  2. B
    50.3
  3. C
    52.8
  4. D
    51.5
प्रश्न 47Single Answer
नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): शास्त्रीय भारतीय तर्क के अनुसार यह तर्क - 'ध्वनि गुणवत्ता है क्योंकि यह दृश्यमान है' भ्रामक है।
कारण (R): तर्क के शास्त्रीय भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार, तर्क - 'ध्वनि गुणवत्ता है क्योंकि यह दृश्यमान है' में एक मध्यम शब्द शामिल है जो अपने स्वभाव से, गौण शब्द में मौजूद नहीं हो सकता है।
उपरोक्त कथनों के आधार पर, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    दोनों (A) सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. B
    (A) और (R) दोनों सत्य हैं लेकिन (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. C
    (A) सत्य है लेकिन (R) असत्य है।
  4. D
    (A) गलत है लेकिन (R) सही है।
प्रश्न 48Single Answer
एक शिक्षक छात्र के प्रदर्शन का आकलन करना चाहता है और तत्काल फीडबैक देना चाहता है। मूल्यांकन के लिए आप कौन सा सॉफ्टवेयर चुनेंगे?
(A) कहूट
(B) प्लॉटागन
(C) स्क्रीन-कास्टो-मैटिक
(D) एनिमेकर
(E) क्विज़्ज़
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    केवल A, B और D
  2. B
    केवल C, D और E
  3. C
    केवल B और C
  4. D
    केवल A एवं E
प्रश्न 49Single Answer
निम्नलिखित में से कौन से कथन तार्किक रूप से समान हैं?
(A) कुछ वानर गैर-बंदर नहीं हैं।
(B) कुछ बंदर गैर-वानर नहीं हैं।
(C) कुछ बंदर वानर हैं।
(D) कुछ वानर बंदर हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
  1. A
    केवल A और B
  2. B
    केवल C और D
  3. C
    केवल B, C और D
  4. D
    A, B, C, और D
प्रश्न 50Single Answer
शहर C से उपस्थित होने वाली लड़कियों की संख्या शहर D से उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों की संख्या का लगभग _________% है।
  1. A
    45
  2. B
    49
  3. C
    54
  4. D
    57
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