एंटरप्रेन्योरशिप में कम ज्यादा का बैलेंस
एंटरप्रेन्येरशिप में उतरते समय आपको इसके तीन प्रमुख पहलुओं पर कम और ज्यादा में संतुलन रखना आता हो।
एंटरप्रेन्योरशिप में रिस्क उठाना जरूरी होता है लेकिन यदि यह रिस्क सोच समझकर नहीं उठाया जाता तो आप लंबे समय तक टिक सकते। एंटरप्रेन्योरशिप में लंबी पारी खेलने के लिए जरूर है कि आप किसी भी प्रोजेक्ट को हाथ में लेने से पहले तीन बिंदुओं पर जरूर गौर कर लें । इन तीन बिदुओं के आधार पर आकलन कर लेने पर आप बेहतर फैसला कर सकते है कि किस काम को हाथ में लेना है और किसे नहीं।
सफलता : मध्यम
किसी भी प्रोजेक्ट को बिना आकलन के अपने हाथ में लेने का नुकसान आपको अपने समय औैर अन्य संसाधनों की बर्बादी के रूप में उठाना पड सकता है। इसलिए ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करें, जिनमें सफलता की संभावना कम से थोडा ज्यादा हो।
विफलता : कम
ऐसे प्रोजेक्ट हाथ में लेने की कोशिश करे, जिनमें विफलता की संभावना कम हो। इस बात का यह अर्थ नहीं कि जोखिम उठाया ही न जाए। इसका आश्य यह है कि आपकी गणनाएं इतनी तर्कसंगत और तथ्यों पर आधारित हों कि भारी दिखने वाले जोखिम के अंदर छिपी सफलता की अच्छी संभावनाएं आप पहचान सके और काम कर सकें।
उपलब्धि : एंटरप्रेन्येदशिप में
जिस एक चीज का सबसे अधिक महत्व माना जाता हैं, वह है नई से नई उपलब्धियां । जिन प्रोजेक्ट्स में आपको नए क्षेत्रों में प्रवेश का , नई तकनीकों के जरिए विस्तार का मौका मिले, उन्हें अपनाने से न चूकें। आपकी ये उपलब्धियां आपके लिए एक एसेट बन जाती है और इससे बिजनेस को विस्तार की नई दिशा मिल जाती है। इसे अपने लक्ष्य में जरूर शामिल करें।