कुषाण

1. कुषाण  चीन  के  यू - ची  कबीले  से  सम्बद्ध  थें । यू - ची  "तोखरी" के  नाम  से  भी  जाने  जाते  थें । यह  कबीला  पाँच  शाखाओं  में  विभाजित  था । इनमें  से  एक  शाखा  भारत  में  आई । 
2. भारत  में  सर्वप्रथम  कुजुल  कडफिसस  ( 15 - 64 ई़़. ) ने  कुषाण  वंश  की  स्थापना  की । उसने  रोमन  सिक्कों  की  नकल  करके  ताँबे  के  सिक्के  ढलवाए  तथा  महाराजाधिराज  की  उपाधि  धारण  की । 
3. कुजुल  कडफिसस  के  प्रारम्भिक  सिक्कों  पर  यूनानी  राजा  हर्मियस की  आकृति  मिलती  हैं । इसका  अर्थ  है  कि  वह  पहले  यूनानी  राजा  हर्मियस  के  अधीन  था । 
4. बिम  कडफिसस  को  भारत  में  कुषाण  की  शक्ति  का  वास्तविक  संस्थापक  माना  जाता  हैं । उसने  बडी़  संख्या  में  सोने  के  सिक्कें  चलवाए । उसके  सिक्कों  पर  एक  यूनानी  लिपि  तथा  दूसरी  ओर  खरोष्ठी  लिपि  उत्कीर्ण  हैं ।
5. बिम  कडफिसस  शैव  मत  का  अनुयायी  था । इसके  कुछ  सिक्कों  पर  शिवए नन्दी  तथा त्रिशूल  की  आकृतियाँ  मिलती  हैं । इसने  महेश्वर  की  उपाधि  धारण  की  थी । 
6. कनिष्क ( 78 - 105 ई. ) इस  वशं  का  सर्वाधिक  महान  शासक  हुआ । इसने  एक  विशाल  सामा्रज्य  का  निर्माण  किया । 
7. कनिष्क  का  साम्राज्य  आक्सस  नदी  से  गंगा  नदी  तक  तथा  बैक्ट्रिया से  बनारस  तक  फैला  हुआ  था । इसमें  रूस  का  एक  भाग, ईरान  का  एक  भाग, अफगानिस्तान, पाकिस्तान  तथा  भारत  का  एक  बड़ा  हिस्सा  शामिल  था । 
8. कनिष्क  के  सिक्कों  पर  हेराक्लीज, सूर्य, शिव  अग्नि  आदि  देवताओं  के  चित्र  मिलतें  हैं । उसे  ताम्र सिक्कों  में  वेदी  पर  बलि  चढ़ाते  हुए  दिखाया  गया  हैं । 
9. कनिष्क  ने  शक  संवत  ( 78 ई़. ) चलाया  जो  भारत  सरकार  का  सरकारी  कैलेण्डर  हैं । उसने  महायान  बौद्ध  धर्म  को  संरक्षण  दिया  तथा  कश्मीर  के  कुण्डल  वन  में  चतुर्थ  बौद्ध संगीति  आयोजित  करवाई । 
10. कनिष्क  का  उतराधिकारी  हुविष्क  था, उसने  कश्मीर  में  हुष्कपुर  नामक  नगर  की  स्थापना  करवाई  थी । 
11. कुषाण  शासकों  ने  महाराजधिराजए देवपुत्रए केसर  जैसी  उपाधियाँ  धारण  कीं । 
12. कुषाणों  ने  सर्वाधिक  शुद्ध  स्वर्ण  सिक्के  ( 124 ग्रेन ) जारी  किए । इन्हें  सर्वाधिक  ताम्र  सिक्कें  चलाने  का  श्रेय  भी  प्राप्त  हैं ।